जैविक खेती (Organic farming in hindi):- जैविक खेती की अवधारणा एवं कार्य क्षेत्र

जैविक खेती (Organic farming in hindi):- जैविक खेती की अवधारणा एवं कार्य क्षेत्र
जैविक खेती (Organic farming in hindi):- जैविक खेती की अवधारणा एवं कार्य क्षेत्र 


जैविक खेती (Organic farming in hindi):- जैविक खेती की अवधारणा एवं कार्य क्षेत्र 


अन्तराष्ट्रीय जैविक कृषि गतिविधि संघ के 1972 अनुसार | International Fedration on Agriculture movement (IFOAM) -

जैविक कृषि एक उत्पादन प्रणाली है जो मृदा, पारिस्थिकी और लोगों के स्वास्थ्य को बनाए रखती है तथा इसमें किसी भी प्रकार के रसायनों को नहीं डाला जाता है। एवं पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने हेतु, गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मीकम्पोस्ट, हरी खाद एवं जैव उर्वरक पर निर्भर रहते है।

प्रमाणित जैविक कृषि -

इसमें जैविक शब्द एक लेबल है। जो यह दर्शाता है कि मान्यता प्राप्त संस्थाओं के द्वारा निर्धारित मानको का उत्पादन कर्ता द्वारा पूरी तरह पालन किया जाता है।

जैविक खेती के निर्धारित मानक -

  • संश्लेषित रसायनों का पूरी तरह प्रतिबंधित।
  • कृषि हेतु ऐसे फार्म का चयन करना जिसमें 23 वर्ष से रसायन उपयोग में नहीं लिए गए है।
  • जैविक उत्पादों को अप्रमाणित उत्पादों से अलग रखना।
  • समय समय पर खेतों का प्रमाणिकृत संस्थाओं द्वारा निरीक्षण करना।


जैविक खेती की अवधारणा -

  • ऋषि पाराशर ने बताया कि जन्तुनाम् जीवनम कृषि ।
  • आधुनिक जैविक खेती का सिद्धान्त सर अल्बर्ट हॉवार्ड ने 1930 में दिया।
  • सर अल्बर्ट हॉवार्ड को जैविक खेती का पिता कहा जाता है।


Organic Farming शब्द किसने दिया -

लॉर्ड वाल्टर नोर्थबोर्न ने 1940 में दिया बुक-लुक टू दी लैंड।
प्राकृतिक खेती के जनक मोसानोबू फुकुओका (जापान के किसान)
1924 में रूडोल्फ स्टीनर ने बायो डाइनेमिक (जैय गतिकी) की खोज की।

जैविक कृषि के अन्य नाम -

  • पारिस्थिकी कृषि
  • बायो डायनामिक कृषि
  • प्राकृतिक कृषि
  • टिकाऊ कृषि
  • ऋषि कृषि
  • जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग
  • अग्नि होत्र कृषि
  • परमा कल्चर


जैविक खेती के सिद्धांत अंतर्राष्ट्रीय जैविक कृषि गतिविधि (IFOAM) संघ के अनुसार जैविक खेती के चार सिद्धांत है।
स्वास्थ्य का सिद्धांत

  1. पारिस्थिकी का सिद्धांत (पर्यावरण का सिद्धांत)
  2. न्याय एवं निष्पक्षता का सिद्धांत
  3. विश्वास का सिद्धांत (सेवा का सिद्धांत)

भारत में जैविक खेती का भविष्य -

अप्रैल, 2000 में एवं वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम की शुरूआत की गई।

2 जुलाई 2001 में जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण के लिए चार संस्थाओं की स्थापना की गई।

  • टी बोर्ड
  • स्पाइस बोर्ड
  • कॉफी बोर्ड
  • APEDA
  • 2004 में राष्ट्रीय जैविक खेती केन्द्र की स्थापना गाजियाबाद (U.P.) में हुई।
  • परम्परागत कृषि विकास योजना इसकी स्थापना अप्रैल 2015 में हुई।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड की स्थापना 19 फरवरी 2015 सुरतगढ़ (गंगानगर) से हुई।
  • योजना आयोग के अनुसार भारत में कुल कृषित क्षेत्रफल का 10% क्षेत्रफल जैविक खेती के अन्तर्गत होना चाहिए।
  • 18 जनवरी 2016 में सिक्किम राज्य को पहला जैविक राज्य घोषित किया गयज्ञ
  • वर्तमान में विश्व में जैविक खेती लगभग 179 देशों में की जा रही है।
  • इसके अन्तर्गत 509 लाख हेक्टेयर (50.9 million) में की जा रही है।
  • इस खेती को करने के लिए 24 लाख किसान कार्यरत है।
  • विश्व में सबसे अधिक जैविक खेती करने वाले किसान भारत में है।
  • भारत में जैविक खेती के अन्तर्गत 57.1 लाख हेक्टेयर कृषित क्षेत्र है।
  • भारत में 2014-16 में 135 लाख टन जैविक उत्पादन हुआ।
  • भारत में सबसे जैविक कृषि मध्य प्रदेश में की जाती है दूसरा स्थान महाराष्ट्र राजस्थान का तीसरा स्थान है।
  • FAO-खाद्य और कृषि संगठन 1945 (रोम, ईटली)
  • भारत का कुल कृषित क्षेत्र 143 मिलियन हेक्टेयर
  • अन्तर्राष्ट्रीय मृदा वर्ष 2015
  • राजस्थान का जैविका जिला डूंगरपुर

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