![]() |
कृषि (Agriculture In Hindi):- शस्य विज्ञान का अर्थ, परिभाषा एवं फसलों का वर्गीकरण |
कृषि क्या हैं? (Agriculture In Hindi)
परिभाषा - कृषि (खेती) मानव का प्राथमिक उद्यम है जिसमें वह प्राकृतिक संसाधनो का प्रयोग करके अपनी अनिवार्य भौतिक आवश्यकताओं (रोटी, कपडा, मकान) की पूर्ति करता है, जिसके लिए यह फसलें उगाता है, पशुपालन करता है।कृषि का अर्थ | Agriculture meaning in hindi
Agriculture शब्द लेटिन भाषा के दो शब्दो से मिलकर बना है Ager / Agric + Cultura | Ager / Agric का अर्थ है मृदा अथवा भूमि । Cultura का अर्थ है जुताई अथवा उगाना ।
शस्य विज्ञान अथवा फसल शास्त्र (Agronomy In Hindi) -
परिभाषा - कृषि विज्ञान की यह शाखा जिसमें फसल उत्पादन से संबधित सिद्धान्तों एवम् विधियों का अध्ययन किया जाता है। शस्य विज्ञान (एग्रोनॉमी) कहलाती हैं। अथवा "कृषि विज्ञान की यह शाखा जिसमें खेत के प्रबन्धन का अध्ययन किया जाता है शस्य विज्ञान कहलाता है।"शस्य विज्ञान (एग्रोनॉमी) का अर्थ | agronomy meaning in hindi
Agronomy शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है। Agros + Nomos | Agros का अर्थ है खेत तथा Nomos का अर्थ है प्रबंधन ।
शस्य विज्ञान के पितामाह पीटर ठेक्रेसेन्जी (1230-1307) पुस्तक ऑप्यूस रूरेलियम केमोडरम ।
आधुनिक शस्य विज्ञान का जनक जेथ्रोटुल पुस्तक हॉर्स होईंग हसबेन्ड्री।
शस्य विज्ञान के पितामाह पीटर ठेक्रेसेन्जी (1230-1307) पुस्तक ऑप्यूस रूरेलियम केमोडरम ।
आधुनिक शस्य विज्ञान का जनक जेथ्रोटुल पुस्तक हॉर्स होईंग हसबेन्ड्री।
फसल (Crop) - अर्थ,परिभाषा एवं वर्गीकरण
भूमि की तैयारी करके उगाया जाने वाला पौधों का समूह जो किसी न किसी आर्थिक उद्देश्य की पूर्ति करता हो फसल कहलाता है।फसलों का वर्गीकरण | classification of crops in hindi
A. ऋतुओं के आधार पर फसलों का वर्गीकरण -
- खरीफ की फसलें - बुवाई का समय -जून-जुलाई । उदा. लोबिया, ग्वार, ऊँचा, सोयाबीन, कपास, सनई, मूंग, उडद, अरहर, तिल, ज्वार, बाजरा, धान, मूंगफली।
- रबी की फसलें - बुवाई का समय -अक्टूबर-नवम्बर । उदा लाही, अलसी, जौ, जई, चुकन्दर, गन्ना, चना, सरसों, मसूर, आलू मटर, गेंहू, रिजका, तम्बाकु।
- जायद की फसलें - बुवाई का समय - मार्च-अप्रैल । उदा. मक्का चरी ज्वार चरी, मूंग, उड़द, तरबूज, खरबूज ।
B. आर्थिक आधार पर फसलों का वर्गीकरण-
- अनाज वाली फसलें - ये फसले कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख स्त्रोत होती है। उदा- गेहूँ, धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, जो, जई, कोदो, कुटकी, रागी, साँवा, कंगनी, काकुन ।
- दलहनी फसलें - ये फसले प्रोटीन का प्रमुख स्त्रोत होती है।उदा. घना, मटर, मसूर, अरहर, मुँग, उडद, लोबिया (चॅवला)
- तिलहनी फसलें - उदा. सोयाबीन, मूंगफली, सरसों, तिल, रामतिल (नाइजर), अलसी, सूरजमुखी, कुसुम, अरण्डी, नारियल, केनोला (सरसों ऑइलपाम ।
- शर्करा वाली फसलें - उदा. - गन्ना, चुकन्दर, शुगरपॉम (ताड़), ज्वार की मीठी किस्में ।
- रेशे वाली फसलें - उदा-कपास, जूट. सनई, मेस्टा, अलसी, उँचा, नारियल, ल्यूफा (गिलकी)।
- चारे वाली फसलें - उदा. रिजका, बरसीम, ग्वार, लोबिया, मक्का चरी, ज्यार चरी, नेपियर घास ।
- मसाले वाली फसलें - उदा. लोंग, इलायची, काली मिर्च, हल्दी, धनिया, जीरा, सौंफ, अजवाइन, मैथी, ।
- रंग वाली फसलें - उदा नील, कुसुम।
- औषधीय फसलें - उदा. तुलसी, पुदीना, अश्वगंधा, गिलोय, सफेद मूसली, ईसबगोल, सर्पगन्धा।
- उद्दीपक फसलें - उदा. - चाय, कॉफी, अफीम, तम्बाकु, धतुरा, भांग।
C. कुलों के आधार पर फसलों का वर्गीकरण-
- ग्रेमिनी/पोऐसी - उदा. सभी अनाज वाली फसले। गन्ना, बाँस, कॉस, नेपियर घास, अंजन घास।
- लेग्युमिनोसी / फेबेसी - उदा. चना, मटर मूंग उडद, अरहर, मसूर, चवला, राजमा, मैथी, रिजका, बरसीम, सनई, उँचा, सोयाबीन मूंगफली।
- सोलेनेसी - उदा. आलू, टमाटर, बैंगनी, मिर्च, तम्बाकु अश्वगंधा, धतुरा।
- मालवेसी - उदा. कपास, पटसन, भिण्डी, गुडहल।
- कम्पोजिटी/एस्टरेसी - उदा. सूर्यमुखी, कुसुम गेंदा रामतिल (नाइजर)।
- क्रुसीफेरी / ब्रेसीकेसी - उदा. - सरसों. पीली सरसों, भूरी सरसों, राई, राया, लाहा, तौरिया, कैनोला, मूली, शलजम ।
- कुकुरबिटेसी - उदा-कदु, लोकी, गिलकी, करेला, तुरई, टिण्डा, परवल, तरबूज, खरबूज।
- चिनोपोडिएसी - उदा. चुकन्दर, पालक, बथुआ ।
- अम्बेलीफेरी/एपीएसी - उदा. धनिया, जीरा, सौफ अजवाइन, गाजर।
- पेडीलिएसी - उदा. तिल ।
- टीलिएसी - उदा. जूट. फालसा।
- लिनिएसी - उदा. अलसी
D. विशेष उपयोग के आधार पर-
- नगदी फसलें - ऐसी फसलें जिन्हें सीधे बाजार में बेचकर तुरंत लाभ कमाया जा सकता है। सामान्यतः इन फसलों का भण्डारण करने में किसान रूचि नहीं रखता है। गन्ना, कपास, आलू, तम्बाकू, चाय, कॉफी, रबर, सब्जियों, फल, बैबी कॉर्न।आकस्मिक/ग्राह्य फसल - दो मुख्य मौसमी फसलों के मध्यान्तर में उगायी जाने वाली फसल। उदा. मूंग, उड़द, लाही।यदि किसी कारणवश हमारी मुख्य फसल नष्ट हो जाये एवम् अगली फसल की बुवाई के कुछ समय शेष रह जाये। तो मुख्य फसल के नष्ट होने के कारण फसल की हुई हानि की भरपाई के लिए लघु अवधि वाली फसल को दोनों मुख्य फसलों के बीच लगाते हैं। उदा. तोरिया ।
- मृदा आरक्षक फसलें - ऐसी फसलें जो मृदा क्षरण को कम करती है मृदा आरक्षक फसलें कहलाती है। इन फसलों का प्रयोग मुख्यतया मृदा क्षरण से ग्रसित क्षेत्रों में किया जा सकता है। उदा. मूंग, उड़द, सोयाबीन, लोबिया ।
- मृदा क्षरण को बढ़ावा देने वाली फसलें - उदा. मक्का, कपास, तम्बाकु, अरहर, अरण्डी
- पाश फसल/फंदा फसल (ट्रेप क्रॉप) - मुख्य फसल के कीटों को आकर्षित करने हेतू लगायी जाने वाली फसल को 'ट्रेप क्रॉप' कहा जाता है। उदा. (i) कपास के चारों ओर भिण्डी लगाना, (ii) चने में अरहर चने की सुण्डी - हेलिकोवर्पा, (iii) पत्तागोभी में सरसों लगाना, (iv) टमाटर के साथ गेंदा लगाना ।
- सूचक फसल - ऐसी फसलें जो पानी अथवा पोषक तत्वों की कमी के लक्षणों को अन्य फसलों की तुलना में शीघ्रता से प्रदर्शित करती है। सूचक फसलें कहलाती है, उदा. मक्का सूरजमुखी
- शिकारी/प्रे फसल - ऐसी फसलें जो अपनी अत्यधिक घनी वृद्धि से खरपतवारों की जनसंख्या को कम कर देती है। ये फसलें भौतिक रूप से प्रतियोगिता करके खरपतवारों को पुष्पन, बीज, निर्माण अवस्था तक नहीं जाने देती है, उदा. बरसीम
- नामी फसलें - कुछ फसलें किसी स्थान विशेष पर अन्य फसलों की तुलना में अधिक लाभ प्रदान करती है। Hub-crops या नाभि फसलें कहलाती है। शहर के निकट सब्जियों की खेती, शुगरमिल के पास गन्ने की खेती, चिप्स फैक्ट्री आलू की खेती, जिनिंग मिल के पास कपास की खेती।
E. जीवनचक्र के आधार पर वर्गीकरण :-
- एकवर्षीय फसलें - ये फसलें अपना जीवन काल 1 वर्ष में पूर्ण कर लेती है। गेहूँ, जौ, मक्का, चना आदि।
- द्वि वर्षीय फसलें - प्याज, चुकन्दर, गाजर।
- बहु वर्षीय फसलें - ये फसलें अपना जीवन काल 2 वर्ष से अधिक समय में पूर्ण करती है। उदा उद्यानिकी फसलें, अरहर, देशी कपास, गन्ना, रिजका नेपियर घास।
Post a Comment